Pranayam In Hindi | प्राणायाम / श्वास विज्ञान

प्राणायाम (Pranayam) अर्थात श्वास-विज्ञान। हमारा जीवन पूर्णतः श्वास क्रिया पर ही निर्भर है। श्वास लेना ही जीना है , और श्वास के बिना जीवन नहीं है। मनुष्य भोजन के बिना कुछ समय तक जी सकता है , पानी के बिना भी कुछ थोड़े समय तक जी सकता है , परन्तु बिना श्वास लिए उसका जीवन कुछ क्षणों तक ही रह सकता है।

प्राणायाम (Pranayam) दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘प्राण + आयाम’। प्राण वह शक्ति है जो समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त है। प्राण सजीव या निर्जीव सभी में समाविष्ट है। यह छोटे से छोटे ऊष्मज से लेकर बड़े से बड़े मनुष्य , जीव ,जंतु सभी में पाया जाता है। प्राण हवा की अपेक्षा अधिक सूक्ष्म है। प्राण एवं श्वसन-वायु का गहरा सम्बन्ध है , परन्तु वे दोनों एक नहीं है। जो वायु हम श्वसन द्वारा ग्रहण करते है , वह सूक्ष्म प्राण को लिए होती है। आयाम का अर्थ है – विस्तार। अतः प्राणायाम का उद्देश्य शरीर की प्राण शक्ति को बढ़ाना तथा विकसित करना है।

श्वास (Pranayam) तथा जीवन-प्रक्रिया का सम्बन्ध

मानवीय – जीवन अवधि श्वसन – प्रणाली पर निर्भर है। धीरे एवं दीर्घ श्वास लेने वाला व्यक्ति जल्दी श्वास लेने वाले व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक काल तक जीवित रहता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन काल में श्वासों की संख्या निश्चित रहती है। प्रत्येक श्वास की लम्बाई बढाकर उम्र भी बढ़ाई जा सकती है। प्रत्येक श्वास को दीर्घ एवं गहरी बनाकर प्रत्येक श्वास से अधिक प्राण शक्ति ग्रहण की जा सकती है।

लम्बी श्वास लेने वाले जानवर जैसे – सर्प, हाथी, कछुआ आदि दीर्घ काल तक जीवित रहते है। इसके विपरीत तीव्र गति से श्वास लेने वाले जानवर जैसे – पक्षी , कुत्ता , खरगोश आदि की जीवन अवधि कम रहती है।

मनुष्य स्वाभाविक रूप से उचित तरीके से श्वास लेता था , परन्तु सभ्यता ने उसे इस विषय में क्या से क्या कर दिया। उसने चलने , उठने , बैठने और खड़े होने के उचित तरीको को छोड़कर अनुचित तरीके अपना लिए है। जिसके कारण उसने उचित तरीके से श्वास लेना छोड़ दिया है। आधुनिक व्यक्ति को विशेषकर इस बात पर ध्यान देना चाहिए क्योकि उन्हें छोटी श्वास लेने की आदत पढ़ गयी है।

प्राणायाम के लाभ | Pranayam Benefits

प्राणायाम का उद्देश्य प्राण का विस्तार और उसको नियंत्रित करना है। इससे शरीर को लाभ तो है ही अपितु सूक्ष्म रूप से प्राणायाम श्वसन के माध्यम से प्राणमय कोष की नाड़ियो , नलिकाओं एवं प्राण के प्रवाह पर प्रभाव डालता है। नाड़ियो का शुद्धिकरण होता है तथा शारीरिक और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।

  • मन को स्थिरता एवं शांति प्रदान करता है।
  • शरीर में ऑक्सीजन (oxygen) अतिरिक्त मात्रा में पहुँच कर शरीर का पोषण करता है।
  • फेफड़ो में एकत्रित समस्त पुरानी वायु का निष्कासन होता है।
  • मस्तिष्क की कोशिकाओं को शुद्ध करता है।
  • मानसिक तनाव, क्रोध, चिंता, को दूर करता है।

श्वास – प्रश्वास की विधि

अधिकांश लोग गलत तरीके से श्वास क्रिया करते है। लोग फेफड़ो के कुछ भाग का ही उपयोग करते हुए अधूरी श्वास ही लेते है। इसके कारण हमारे समस्त शरीर एवं मस्तिष्क में पोषण की कमी हो जाती है। वर्तमान में अनेक बीमारियों का कारण यही है। यह अवश्य याद रहे की श्वास के बिना हम जीवित नही रह सकते तथा आधी श्वास लेने से हमारी उम्र भी आधी हो जाती है।

श्वास प्रक्रिया का विभाजन इस प्रकार है :

१. छाती द्वारा श्वसन

इसमें छाती या पसलियों का विस्तार करते हुए पूरक करते है अर्थात श्वास लेते है। इसमें केवल पसलियों ऊपर बाहर की ओर उठ जाती है। और रेचक करने के साथ ही पसलियों में उतार आ जाता है।

इस प्रकार साँस लेने में छाती और फेफड़ो का केवल ऊपरी भाग,जो बहुत ही छोटा होता है, काम में आता है। परिणाम यह होता है कि फेफड़ो में बहुत कम हवा प्रवेश पाती है।

२. उदर द्वारा श्वसन

इसमें उदर प्रदेश को फूलाते हुए पूरक करते है अर्थात श्वास लेते है। इसमें पेट ऊपर बाहर की ओर उठ जाता है। और रेचक करने के साथ ही पेट अंदर की और जाता है।

इसमे छाती द्वारा श्वसन के स्थान पर अधिक हवा प्रवेश कर पाती है।

३. योगिक श्वसन

उपरोक्त दोनों प्रकार की श्वसन – प्रक्रियाओं के योग (मेल) से यह संभव है कि फेफड़ो में अधिक से अधिक मात्रा में वायु का प्रवेश किया जाये एवं रेचक द्वारा त्याज्य (बेकार) वायु का निष्कासन अधिक से अधिक मात्रा में किया जाये।

इस प्रकार की श्वसन – क्रिया प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी है। इसे योगिक श्वसन कहते है। सभी को इसी तरह श्वास लेना और छोड़ना चाहिए।

अभ्यास की विधि :

पहले उदर में फिर छाती में धीरे – धीरे अधिक से अधिक वायु का प्रवेश कीजिये , जितना संभव हो सके। सर्वप्रथम छाती को , फिर उदर को शिथिल करते हुए रेचक कीजिये।

सम्पूर्ण क्रिया धीरे – धीरे बिना किसी झटके से होनी चाहिए।

इस अभ्यास से आपके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आ जायेगा। आपमें अनंत प्राण शक्ति का विकास होगा तथा आपको जल्दी थकान का अनुभव नहीं होगा। आपकी चिंतन शक्ति विकसित होगी।

यह लेख अवश्य पढ़े : Asana/Yogasana In Hindi | आसन/योगासन

Leave a Comment