Khoon Saaf Karne Ki Ayurvedic Dawa

Khoon Saaf Karne Ki Ayurvedic Dawa” इस article में हम आपको पूरी जानकारी देंगे कि हमारा खून अशुद्ध क्यों हो जाता है? हम रक्त को कैसे शुद्ध करते हैं? रक्त शुद्ध करने के लिए कैसा भोजन करना चाहिए और साथ ही रक्त शुद्ध करने के 3 सबसे प्रभावी तरीके क्या है ?

आयुर्वेदशास्त्र में रस , रक्त , मांस , मेदा , अस्थि , मज्जा तथा शुक्र ये सात ‘ धातु ‘ कहे जाते हैं और जब ये वात आदि दोषों द्वारा दूषित किये जाते हैं , तो इन्हें ‘ दृष्य ‘ कहते हैं ।

आयुर्वेद के अनुसार खून पित्तदोष या रक्त धातु में गर्मी के बढ़ने के कारण होता है। हमारा शरीर रक्त के अशुद्ध होने पर हमें संकेत देता है जो त्वचा की समस्याओं (Skin Problems) के रूप में शरीर पर सबसे अधिक देखे जा सकते हैं। खुजली, एलर्जी, फुंसी, पित्ती या एक्जिमा यह सभी अशुद्ध रक्त के संकेत होते है। हमारा शरीर के सभी अंग रक्त से जुड़े होते है। इसीलिए अगर हमनें इन लक्षणों पर ध्यान नहीं दिया तो ये गंभीर बीमारी बन सकते हैं।

हमारा खून अशुद्ध क्यों हो जाता है?

आयुर्वेद नकारात्मक भावनाओं को अशुद्ध रक्त का प्रमुख कारण मानता है। जब हम क्रोधित होते हैं, डरते हैं, ईर्ष्या करते हैं या दुखी होते हैं तब हमारा शरीर कुछ ऐसे स्राव करता है जो रक्त में अशुद्धता पैदा करते हैं।

तनाव को दूर करने के लिए आप रोज सिर्फ कुछ मिनट के लिए योगाभ्यास कर सकते है। आप Surya Namaskar और Padmasana कर सकते है। यह आपको बहुत लाभ पहुँचा सकते है।

रक्त के अशुद्ध होने का कारण ज्यादा Carbonated drinks, चिप्स, बिस्कुट, चॉकलेट, तले हुए खाद्य पदार्थ, नॉनवेज या अत्यधिक नमकीन खाना भी हो सकता है। घर में ज्यादा मसालेदार और खट्टा खाना भी खून को अशुद्ध कर सकता है। और इसका सबसे बड़ा कारण विरूद्ध आहार (wrong food combinations) होता हैं।

नमक और दूध को मिलाकर खाना सबसे common है। यदि आप रोटी के लिए आटा बनाते समय दूध डालते हैं या नमकीन स्नैक्स के साथ चाय पीते हैं, तो आप अपने खून को अशुद्ध कर रहे हैं।


रक्त शोधन क्यों महत्वपूर्ण है ?

रक्त हमारे पुरे शरीर में लगातार बहता रहता है और विषाक्त पदार्थों (toxins) के कारण, शरीर के अंग में ऑक्सीजन, हार्मोन, विटामिन और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का परिवहन करने वाला रक्त अशुद्ध हो जाता है और ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता है।

यदि इन toxins को पूरी तरह से ख़त्म नहीं किया गया तो यह गंभीर रोगों को जन्म दे सकते है।


रक्त को कैसे शुद्ध करें ?

हमारे तीन अंग – लिवर, प्लीहा और किडनी, रक्त को शुद्ध करने का काम करते हैं। हम हमारे शरीर को Toxins से इतना भर देते हैं, जिससे यह इतनी अच्छी तरह से काम नहीं कर पाते हैं। तो सबसे पहले हमें हमारे अंदर से toxins कम करने है। इसके लिए आप जितना हो सके गलत खान-पान से बचे और 15 दिनों में एक बार उपवास करना बहुत लाभ करता है।

रात का खाना जल्दी कर ले इससे हमारे शरीर को खुद को फिर से स्वस्थ (heal) करने के लिए अच्छा समय मिलता है। हमारी सातों धातुओं में आयुर्वेद, रक्त धातु को प्रमुख महत्व देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बाकि सभी धातु हमारे रक्त की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार रक्त शुद्ध करने के 3 सबसे प्रभावी तरीके ( Khoon Saaf Karne Ki 3 Ayurvedic Dawa )

हम आपको Khoon Saaf Karne Ki 3 Ayurvedic Dawa बता रहे है जिन्हें आप घर पर आसानी से कर सकते है।

1. नीम के पत्ते – आपको पांच दिनों तक लगातार चार से पांच नीम के ताजे पत्ते लेना है। हमें लगभग हर इलाके में आसानी से नीम के पेड़ मिल सकते हैं, चाहे हम भारत के किसी भी हिस्से में रहते हों। नीम स्वाभाव से ठंडी होती है और त्वचा विकारों के लिए नीम अत्यंत लाभकारी है। हर सुबह सिर्फ पांच दिनों के लिए, नाश्ते से 1 घंटे पहले चार से पांच ताजे नीम के पत्ते चबाएं। ताजा और नए पत्ते पुराने पत्तों की तुलना में अधिक गुणकारी होते हैं।

2. खादीरारिष्ट सिरप अगर आप नीम नहीं खा सकते तो आप महामंजिष्ठादि क्वाथ, और खादीरारिष्ट नाम की आयुर्वेदिक सिरप का उपयोग कर सकते हैं। इसमें मंजिष्ठा, नीम, गिलोय, हल्दी, आंवला और कई तरह की रक्त को शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटियों का उपयोग किया गया हैं। आपको बस इतना करना है कि तीन चम्मच महामंजिष्ठादि क्वाथ और तीन चम्मच खादीरारिष्ट छह चम्मच पानी के साथ भोजन के 30 मिनट बाद, दिन में दो बार, एक बार नाश्ते के बाद और एक बार रात के खाने के बाद लें। आप किसी भी brand की ले सकते है। आपको यह किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर आसानी से मिल जाएँगी। इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

3. गुड़हल के फूलफिर तीसरा विकल्प है गुड़हल की चाय पीना। गुड़हल के फूल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर प्राकृतिक रक्त शोधक है। गुड़हल का फूल खून, दिल और दिमाग के लिए बहुत अच्छा है। गुड़हल के फूल त्वचा की रंगत में सुधार करते हैं। सूखे हुए गुड़हल के फूल ऑनलाइन और ऑफलाइन बहुत आसानी से उपलब्ध हैं।बस कुछ फूल लें और उन्हें लगभग 500 पानी के साथ एक पैन में डाल दें। तब तक उबालें जब तक कि एक चौथाई पानी न रह जाए। अगर आप इसे मीठा करना चाहते हैं तो इसे छान लें और मिश्री ( धागे वाली ) मिला लें। इसका सेवन गर्म या ठंडा किसी भी रूप से किया जा सकता है।

इन तीनों उपायों में से आप अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी चुन सकते हैं।


रक्त शुद्ध करने के लिए भोजन

आपको ऐसे खाद्य पदार्थों को भी प्रयोग में लाना चाहिए जो रक्त के लिए फायदेमंद हैं। गाजर, चुकंदर, कद्दू, और लोकी को आप अपने भोजन में किसी भी रूप में शामिल कर सकते हैं। अनार, आम, जामुन, सेब और आंवला कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो फायदेमंद है। स्वाद में कड़वे खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से रक्त शुद्ध करने वाले होते हैं। इसलिए हफ्ते में कम से कम एक बार कड़वी चीजें जरूर खाए। अदरक, मेथीदाना और गुड़ भी रक्त को शुद्ध करते हैं।


खादीरारिष्ट सिरप के फायदे

आयुर्वेदिक औषधियां बीमारियों के जड़ पर प्रहार करती है और त्वचा की अधिकतर बीमारियों का कारण रक्त की अशुद्धि होता है। खादीरारिष्ट एक ऐसी ही औषधि है जो हमारे रक्त को शुद्ध करती है, और त्वचा के रोगों को जड़ से मिटाने का कार्य करती है। यह त्वचा रोग, मुहासे, खाज-खुजली आदि रोगो ले लिए लाभदायक है। इसे आप “khoon saaf karne ki tonic” भी कह सकते है।

खादीरारिष्ट के कोई side effect नहीं है परन्तु फिर भी इसे लेने से पहले आप किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।


हमें आशा है कि आपको यह लेख Khoon Saaf Karne Ki Ayurvedic Dawa” पसंद आया होगा।
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Faq Questions :-

आयुर्वेद नकारात्मक भावनाओं को अशुद्ध रक्त का प्रमुख कारण मानता है। रक्त के अशुद्ध होने का कारण ज्यादा Carbonated drinks, चिप्स, बिस्कुट, चॉकलेट, तले हुए खाद्य पदार्थ, नॉनवेज या अत्यधिक नमकीन खाना भी हो सकता है।
हम हमारे शरीर को Toxins से इतना भर देते हैं। तो रक्त शुद्ध करने के लिए हमें सबसे पहले हमारे अंदर से toxins कम करने है।
खून ख़राब होने पर त्वचा की समस्याओं (Skin Problems) हो सकती हैं। खुजली, एलर्जी, फुंसी, पित्ती या एक्जिमा यह सभी अशुद्ध रक्त के संकेत होते है।

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