क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें | How to control anger in hindi

क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें” इस लेख में हम आपको क्रोध क्या है ? इससे हमें क्या नुक्सान है और क्रोध पर नियंत्रण करना क्यों आवश्यक है तथा इसे कैसे नियंत्रित करें, यह बताएँगे।

हमें लगता है कि क्रोध किए बिना हम अपना काम नहीं करवा सकते। हम क्यों हमेशा बच्चों या कर्मचारियों, या जो लोग हम पर निर्भर हैं उन पर क्रोधित हो जाते हैं? यदि आप भी अपने क्रोध पर नियंत्रण ना कर पाने के कारण परेशान हैं, तो हम आपकी सहायता कर सकते हैं। चलिए पहले हम क्रोध और इसके प्रभावों को समझ लेते है।


क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें

क्रोध क्या है?

क्रोध एक प्रकार की सामान्य मानवीय भावना है। यह एक सकारात्मक भावना हो सकती है परन्तु जब यह क्रोध बेकाबू हो जाता है तब जीवन के सभी क्षेत्रों में समस्या जन्म लेती है।

आयुर्वेद ने काम , क्रोध , लोभ आदि को ऐसे मानसिक वेग ( impulse ) कहा है जिन्हें रोक देना ही बुद्धिमानी है क्योंकि ये मानसिक वेग पहले हमारे आचार – विचार और व्यवहार को दूषित करते हैं फिर धीरे – धीरे शरीर और स्वास्थ्य का नाश करने लगते हैं।


क्रोध क्यों आता है?

क्रोध का जन्म ‘ काम ‘ की पूर्ति में बाधा पड़ने पर होता है अर्थात हमारी इच्छा या कामना पूरी न होने पर अथवा अपनी इच्छा के विपरीत स्थिति उत्पन्न होने पर क्रोध उत्पन्न होता है।


आपके स्वास्थ्य के लिए क्रोध हानिकारक क्यों है?

अनियंत्रित क्रोध कई दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है। कठिनाई की बात यह है कि शारीरिक रोगों की तो दवा भी होती है पर इन मानसिक रोगों की दवा नहीं होती। ऐसी कोई दवा नहीं जो क्रोध करने की आदत छुड़ा दे, कामुकता की आदत दूर कर दे, लोभ, अहंकार, मत्सर ( ईर्ष्या ) की भावना मन से हटा दे।

मानसिक विकार दूर करना शारीरिक विकार दूर करने की अपेक्षा बहुत ज्यादा कठिन काम होता है । बचपन से जैसा स्वभाव बन जाता है वह दिन – प्रतिदिन और मज़बूत होता जाता है और फिर उसे बदलना बहुत ही कठिन हो जाता है। क्रोध के मामले में भी ऐसा ही होता है।

क्रोध का सबसे बुरा प्रभाव यह पड़ता है कि क्रोध उत्पन्न होते ही विवेक नष्ट हो जाता है, विवेकहीन होकर अच्छे काम नहीं किये जा सकते है और फिर क्रोध के वश में व्यक्ति ऐसे ऐसे जघन्य काम कर डालता है जिसे बिना क्रोध के नहीं कर सकता था। फिर बाद में सिवाय पछताने के और कुछ हाथ में नहीं रहता।

क्रोध करने से शरीर में पित्त का प्रकोप होता है और पित्त कुपित रहने से निम्न लक्षण प्रकट होते हैं :-

  • एसेडिटी
  • हायपरएसेडिटी
  • अपच
  • अनिद्रा रोग
  • चिन्ता एवं मानसिक तनाव
  • पेट में जलन
  • सिरदर्द

इसीलिए जो क्रोधी स्वभाव के होते हैं उनका विवेक और धैर्य तो नष्ट होता ही है, स्वास्थ्य भी नष्ट होता है क्योंकि बार – बार क्रोध करने से जो क्रोधाग्नि उत्पन्न होती रहती है वह पित्त के प्रकोप को शान्त नहीं होने देती बल्कि इसे बनाये रखती है और बढ़ाये जाती है।

आपने अनुभव किया होगा कि क्रोध करनें पर शरीर और सिर गर्म हो जाता है , यह क्रोधाग्नि का ही प्रभाव होता है। क्रोध के प्रभाव से मन की शान्ति और सहजता तो नष्ट होती ही है, भूख और नींद भी उड़ जाती है। क्रोध से हमारे स्नायुओं ( Nerves ) पर बार – बार तनाव आता है इससे हमारा स्नायविक संस्थान ( Nervous System ) दुर्बल होता जाता है।


क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें ?

सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि क्रोध करना कोई अच्छी आदत नहीं क्योंकि क्रोध से घृणा, हिंसा और प्रतिशोध की भावना का जन्म होता है। आपके सामने भले ही कोई कुछ न कहे पर क्रोधी व्यक्ति को कोई पसन्द नहीं करता। क्रोध करने से सिर्फ नुकसान होता है, फ़ायदा कुछ भी नहीं होता इसलिए बुद्धिमान और गम्भीर स्वभाव के लोग क्रोध करते ही नहीं बल्कि विवेक, धैर्य और सहज भाव से काम लेकर उस कारण को ही दूर कर देते हैं जो क्रोध उत्पन्न कर रहा हो।

चाणक्य नीति में कहा है –

“सन्तोष नन्दनवन की तरह सुखदायक , विद्या कामधेनु के समान इच्छित फल देने वाली , तृष्णा वैतरणी नदी की तरह विशाल नदी जैसी और क्रोध साक्षात यमराज के समान है। “

हमें क्रोध तभी आता है जब वैसा न हो रहा हो जैसा हम चाहते हैं, जैसी हम इच्छा ( Choice or Desire ) करते हैं इसके बिना क्रोध हो ही नहीं सकता ।

याद रखिये “क्रोध का जन्म कामना ( इच्छा ) से होता है, और क्रोध पर नियंत्रण करना है तो कामना (इच्छा) करना बंद करना पड़ेगा।

जो व्यक्ति बलवान और समर्थ होकर भी कटुवचन और ताड़ना सह लेता है पर क्रोध नहीं करता बल्कि क्षमा कर देता है , जिसने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है वही पुरुष बुद्धिमान और श्रेष्ठ है। काम, क्रोध, लोभ आदि ये सभी मानसिक आवेग दरअसल इन्सान के दुश्मन हैं इसीलिए इन्हें आयुर्वेद में ‘ षड् रिपु ‘ याने छः शत्रु कहा गया है।

ये मनुष्य को अन्धा कर देते हैं जिससे मनुष्य आंखों के होते हुए भी ऐसा अन्धा हो जाता है कि अपना भला बुरा नहीं देख पाता। अतः आपको अभी से ऐसा अभ्यास करना चाहिए कि आप ‘ क्रोध के प्रभाव से प्रभावित न हो और क्रोध पर नियंत्रण करें।’


ईर्ष्या करने वाला , घृणा करने वाला , असन्तुष्ट रहने वाला , क्रोध करने वाला , सदा शंका करने वाला और दूसरों के भरोसे रहने वाला – ये हमेशा दुखी रहते हैं।

हमें आशा है कि आपको यह लेख ”क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें” पसंद आया होगा।
आपके कोई प्रश्न हो या आप कुछ सुझाव देना चाहते है तो Comment करे।

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