स्वास्थ्य क्या है | Swasthya Kya hai in hindi

स्वास्थ्य क्या है” इस लेख में आप जानेंगे कि स्वास्थ्य होता क्या है ? अर्थात स्वास्थ्य किसे कहते है जिसकी हमें रक्षा करना है तथा इसका महत्व क्या है ?

जब भी स्वास्थ्य की या स्वस्थ रहने की बात आती है तब हमें यही लगता है कि बीमारी से बचने या बीमार न होने की बात है। स्वास्थ्य का अर्थ सिर्फ शारीरिक और मानसिक रोग न होना ही नहीं है अपितु शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टी से संतुलित होना भी है।

स्वास्थ्य क्या है | Swasthya Kya Hai In Hindi

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य” शब्द बहुत ही उपयुक्त और सारयुक्त शब्द है। अंग्रेज़ी में Health (हेल्थ) शब्द का प्रयोग स्वास्थ्य शब्द के पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किया जाता है परन्तु स्वास्थ्य का अर्थ सिर्फ़ Health नहीं होता। जैसे अंग्रेजी के शब्द Disease (डिजीज) का अर्थ सिर्फ रोग नहीं होता। रोग के लिए अंग्रेज़ी में illness शब्द अधिक उपयुक्त है।

Disease शब्द अंग्रेज़ी के Dis+Ease से मिल कर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ ‘बे-चैन’ होना , असन्तुलित होना, और अस्वाभाविक होना है।

इस स्थिति से विपरीत, जो स्थिति होती है याने जिस स्थिति में चैन हो, बेचैनी न हो, मन और शरीर की स्थिति सन्तुलित हो, असन्तुलित न हो, और स्वाभाविक हो अस्वाभाविक न हो उसी स्थिति को “स्वास्थ्य” कहते हैं क्योंकि स्वास्थ्य शब्द ‘ स्व ‘ और ‘ अवस्था ‘ से मिलकर बना है जैसे स्वभाव शब्द ‘ स्व ‘ और ‘ भाव ‘ से मिल कर बना है।

स्वास्थ्य और स्वभाव एक ही अर्थ रखते हैं अर्थात जैसा हमें होना चाहिए उस भाव (दशा) में हमारा स्थित होना स्वभाव अथवा स्वास्थ्य कहा जाएगा और वैसा न होना अस्वाभाविक होने से ‘अस्वास्थ्य’ कहा जाएगा अर्थात अस्वस्थ होना कहा जाएगा।


स्वास्थ्य की रक्षा

हमारे मन एवं शरीर की स्थिति किन कारणों की वजह से स्वाभाविक नहीं होती, इन कारणों को समझना और इन्हें पैदा न होने देना ही स्वास्थ्य की रक्षा करना होता है।

मन को स्वस्थ रखने के लिए किये जाने वाले प्रयत्नों को उचित आचार – विचार करना और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किये जाने वाले प्रयलों को उचित आहार – विहार करना कहा जाता है क्योंकि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए उचित आचार – विचार तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए उचित आहार – विहार का पालन करना अति आवश्यक होता है ।


स्वास्थ्य का क्या महत्व है ?

स्वस्थ रहना हमारा परम कर्त्तव्य है। हमारा जीवन सिर्फ हम तक ही सीमित नहीं है। हमें ईश्वर ने कर्म करने के लिए भेजा है।

यजुर्वेद में निरन्तर कर्मरत रहते हुए सौ वर्ष तक जीने का आदेश दिया गया है –

”कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेत्छतं समाः” अर्थात्‌ ”हे मनुष्य! इस संसार में कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा कर।”

हम जीवन में जो कुछ भी करते हैं वह शरीर के बल पर ही करते हैं और आगे भी तब ही कर पाएँगे जब शरीर को स्वस्थ और सबल रख पाएँगे क्योंकि हमारे जीवन की यात्रा हम इस शरीर रूपी वाहन में बैठ कर ही करते हैं। अगर हमारा शरीर कमज़ोर और रोग ग्रस्त रहेगा तो हमारी जीवन यात्रा भी दुखों एवं बाधाओं से भर जाएँगी।

ऐसा न हो इसीलिए हमें अपने स्वास्थ्य की रक्षा करना होगी। और यह प्रयत्न हमें छोटी आयु से ही शुरू कर देने होंगे ताकि अभी से हमारा शरीर निरोग और बलवान रह सके और हमारी जीवनयात्रा शुरू से सही दिशा में जा सके।

इससे सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि छोटी आयु से हमारी आदतें, हमारी मनोवृत्ति, हमारे विचार और संस्कार वैसी स्थिति में ढलने लगेंगे जैसी स्थिति स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए आवश्यक होती है।

चूंकि हमारे मन और शरीर को स्वाभाविक स्थिति में रखना ही स्वास्थ्य होता है इसलिए हमें स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए मन , वचन , कर्म से निरन्तर रूप से प्रयत्नशील रहना होगा। इस प्रयत्नशीलता को ही स्वास्थ्य – रक्षा करना कहते हैं। स्वास्थ्य रक्षा करके ही हम निरोग रह सकते हैं।


हितकारी आहार विहार करने वाला , विचारपूर्वक काम करने वाला , काम – क्रोध आदि मानसिक वेगों में लिप्त न रहने वाला, दान देने वाला ( उदार हृदय ), सबको समान दृष्टि से देखने वाला ( पक्षपात रहित ), सत्य बोलने वाला, सहनशील और विद्वानों के बताये निर्देशों का पालन करने वाला व्यक्ति निरोग रहता है।

— चरक संहिता शारीरस्थान २/४६

इसलिए हमें ऐसे प्रयत्न करने होंगे कि जो रोग अभी उत्पन्न नहीं हुए हैं वे उत्पन्न ही न हों क्योंकि बीमार पड़ कर इलाज करा कर फिर से स्वास्थ्य लाभ करने से तो यही अच्छा है कि हम बीमार पड़ने से बचें।


हमें आशा है कि आपको यह लेख ”स्वास्थ्य क्या है” पसंद आया होगा।
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धन्यवाद 🙏🏼

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